पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे

बहुत भुलाना चाहा, बहुत कुछ भुलाया, पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे | वो इश्क की राहों में पहले कदम, उन कदमों पे लङखङाना और संभलना याद है मुझे || वो तेरा नजरे मिलाना और पलकें झुकाना याद है मुझे | वो तेरा सब कुछ समझना और बच के निकलना याद है मुझे…More

समझे नहीं जो खामोशी मेरी

समझे नहीं जो खामोशी मेरी, मेरे लब्जों को क्या समझेंगे | बचते रहे उम्र भर साये से मेरे, मेरे जख्मों को क्या समझेंगे | भूल जाना यूँ तो नहीं है, रवायत मोहब्बत की | समझे नहीं जो हालात मेरे, इन रस्मों को क्या समझेंगे | – गौरव संगतानीMore

बात इतनी सी है

जो होना है वो होता है, तेरी मेरी बिसात कुछ भी नहीं. मैं जो यूँ अक्सर उदास रहता हूँ, बात इतनी सी है कि……… बात कुछ भी नहीं. – अज्ञात (कहीं सुना था कभी)More

जिंदगानी

जिंदगी हर पल बस यही सिखाती है, चलने का नाम ही जिंदगानी है | जो थम गया तो मिट गया, दरिया सिर्फ बहता पानी है || – गौरव संगतानीMore

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उंचाई

हे प्रभु…! मुझे इतनी उंचाई कभी मत देना गैरों को गले से लगा ना सकूँ इतनी रुखाई कभी मत देना – अटल बिहारी वाजपेयीMore

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जाते हुए दिन नें

एक क्षणिका….! जाते हुए दिन ने शाम से बस इतना ही कहा ‘अब भी उदास बैठा है वो, न जाने किस गम को दबाए बैठा है वो | उगते हुए सूरज की किरणें, पँछियों की चहचहाहट, खिलते हुए फूल, सुबह की चाय की चुस्की, स्कूल जाते बच्चों का शोर, धान कूटती औरतों की गप्पें, तंदूर…More

तेरी याद में

कभी यूँ ही लिखा था कुछ तेरी याद मे, तेरी याद आयी तो फिर से गुनगुना दिया आज…. “दर्द की इंतहाँ हो गयी है यारों | सुबह चले थे अब शाम हो गयी है यारों | थक गयें हैं लेकिन कोई सहारा नहीं मिलता | समंदर में मौजों को किनारा नहीं मिलता | टूटा तो…More

तुझे नही….!

तुझे नहीं मैं खुद को ढूँढता हूँ | उजालो से डर लगता है, अंधेरों को ढूँढता हूँ | ढूँढता हूँ उस शख्स को, जिसे तूने कभी चाहा था | अपने वादे न निभा पाया, उस गुनाहगार को ढूँढता हूँ | तुझे नहीं मैं खुद को ढूँढता हूँ | उजालो से डर लगता है, अंधेरों को…More