मंजिलें भी उसकी थी…!

मंजिलें भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था |
एक मैं अकेला था, काफिला भी उसका था |
साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी, फिर रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था |
आज क्यों अकेला हूँ, दिल सवाल करता है |
लोग तो उसके थे, क्या खुदा भी उसका था…..!

– अग्यात

3 thoughts on “मंजिलें भी उसकी थी…!

  1. bahut khoob abhi kuchh din pahle kesi ne msg kiya tha in ash aro.n ko. kafi pasand aya
    आज क्यों अकेला हूँ, दिल सवाल करता है |
    लोग तो उसके थे, क्या खुदा भी उसका था…..!

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