समझे नहीं जो खामोशी मेरी

समझे नहीं जो खामोशी मेरी,
मेरे लब्जों को क्या समझेंगे |

बचते रहे उम्र भर साये से मेरे,
मेरे जख्मों को क्या समझेंगे |

भूल जाना यूँ तो नहीं है, रवायत मोहब्बत की |

समझे नहीं जो हालात मेरे,
इन रस्मों को क्या समझेंगे |

– गौरव संगतानी

7 thoughts on “समझे नहीं जो खामोशी मेरी

  1. क्या पंक्तिया लिखी है. गहरे अर्थ समेटे हुए है. लेकिन ये क्या की शुरू हुए नही और ख़त्म.

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s