Gaurav Sangtani
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  • एक मोहब्बत बेनाम

    By gauravsangtani on 23 Mar ’10

    क्यूँ मसरूफ रहें हर वक्त, चंद लम्हें फुर्सत के भी बिताएं जाएँ |
    क्यूँ हर रिश्ते का नाम हो, एक मोहब्बत बेनाम भी निभाई जाये ||
    तेरा नाम न आ जाये जुबान पे, ये कहानी दिल में ही छुपाई जाये |
    खुली आँखों से देखें हैं ख्वाब तेरे, एक रात जग के भी बितायी जाये ||

    - गौरव संगतानी

    Sometimes

    By gauravsangtani on 8 Mar ’10

    Sometimes I want to say “I Love You”,

    but you are not there to say….

    and when you are there,

    I dont want to say rather just look at you…..

    Sometimes I want to say “I Need You”,

    but you dont pick up…

    and when you pick up,

    I dont want to say rather just listen to you…….

    Sometimes I want to say “I Miss You”,

    but can’t find you to say….

    and when I find you,

    I dont want to say rather just feel you…..

    Today I think if I had said that….

    had it made any difference?

    Is it too late for that,

    I don’t want to think all that rather just think of you…….

    - Gaurav Sangtani

    सोचा नहीं कभी हमने

    By gauravsangtani on 23 Feb ’10

    सोचा नहीं कभी हमने,
    क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है |
    क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं,
    आँखें क्यूँ हैरान हैं ||

    सोचा नहीं कभी हमने,
    क्या रिश्ता ये अनजाना सा |
    क्या डोर बांधें है हमको,
    क्यूँ लगता सब अफसाना सा ||

    सोचा नहीं कभी हमने,
    क्या होगा जब तुम जाओगे |
    खुद को ही खो देंगे हम,
    तेरी यादों में ही खोएंगे ||

    - गौरव संगतानी

    हत्थां ते लिखा नहीं मिटदा…..

    By gauravsangtani on 27 Nov ’09

    हत्थां दा लिख्या लक्ख मिटाए कोई,
    हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा…..
    लक्ख करें जतन तू जट्टा,
    किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा….

    लोकी पराये हो गए,
    ते हुए अपने बेगाने…
    किस्मत दा ए रोला सारा,
    ऎंवे कोई नहीं बदलदा….
    हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा…..
    किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा….

    - गौरव संगतानी

    जिंदगी की दास्ताँ

    By gauravsangtani on 26 Nov ’09

    खुद में उलझ के रह गयी, ये जिंदगी की दास्ताँ..
    कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं, न संग कोई कारवां….

    - गौरव संगतानी

    आज बिछडे हैं….. गुलज़ार

    By gauravsangtani on 13 Sep ’09

    आज बिछड़े हैं कल का डर भी नहीं
    जिंदगी इतनी मुख्तसर भी नहीं

    ज़ख़्म दिखते नहीं अभी लेकिन
    ठंडे होगे तो दर्द निकलेगा
    तैश उतरेगा वक्त का जब भी
    चेहरा अंदर से ज़र्द निकलेगा

    आज बिछड़े हैं…

    कहने वालों का कुछ नहीं जाता
    सहने वाले कमाल करते हैं
    कौन ढूंढे जवाब दर्दों के
    लोग तो बस सवाल करते हैं

    आज बिछड़े हैं ..

    कल जो आयेगा, जाने क्या होगा
    बीत जाये जो कल नहीं आते
    वक्त की शाख तोड़ने वालों
    टूटी शाखों पे फल नहीं आते

    आज बिछड़े हैं ..

    कच्ची मिट्टी है, दिल भी इंसा भी
    देखने ही में सख्त लगता है
    आंसू पोंछे तो आंसुओं के निशां
    खुश्क़ होने मे वक़्त लगता है

    आज बिछड़े हैं कल का डर भी नहीं
    जिंदगी इतनी मुख्तसर भी नहीं

    - गुलज़ार

    खुशबु तेरी

    By gauravsangtani on 13 Jul ’09

    भीनी भीनी सी खुशबु तेरी,
    महका महका सा एहसास है… |
    एक अरसा हुआ तुझको देखे हुए…
    पर तू हर लम्हा मेरे पास है…. ||

    - गौरव संगतानी

    जिंदगी यूँ चली

    By gauravsangtani on 25 Apr ’09

    जिंदगी यूँ चली, होके खुद से खफ़ा |
    पाके भी खो दिया, हमने सब हर दफ़ा ||
    कोई साथी नहीं, कोई संग ना चला |
    दर्द की रह में, हँसी हुई बेवफा ||

    - गौरव संगतानी

    कैसे कह दूं….!!!

    By gauravsangtani on 30 Jan ’09

    कैसे कह दूं कि तेरी याद नही आती है,

    मेरी हर सांस मे बस तू ही महकाती है.

    आज भी रातों को जब चौंक के उठता हूँ,

    बस तू ही नही, हर शह तो नज़र आती है..!

    - गौरव संगतानी 

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    एक मोहब्बत बेनाम

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    जिंदगी की दास्ताँ

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    आज बिछडे हैं….. गुलज़ार

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    खुशबु तेरी

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    जिंदगी यूँ चली

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    कैसे कह दूं….!!!

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    Why?

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    आख़िर क्यूँ..

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    दिल्ली धमाके

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    शेर

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    आओ आज नाम बदल लें…!

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    कुछ प्यारे एस. एम. एस (लघु संदेश सेवा)

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