Category: gaurav

आख़िर क्यूँ.. 8

आख़िर क्यूँ..

कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..???   कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं होता कोई तर्क नहीं होता आप स्वीकारें न स्वीकारें…. कोई फर्क नही होता….!!!   कुछ...

आओ आज नाम बदल लें…! 4

आओ आज नाम बदल लें…!

आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़ी सब दौलत और शौहरत, मुझे बेनामी का सुकून लौटा दो…. अक्सर तुम्हे देखा है नुक्कड़ पे बच्चो के साथ फुटबाल खेलते, मैं भी सनडे को साहब के साथ गोल्फ खेलने जाता हूँ….. बोलो तो खेल बदल लें… आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़े सब ओहदे और तोहफे, मुझे बेनामी का प्यार लौटा दो…. कल तुम्हे देखा था दीनू के घर का छप्पड़ डालते, मैं भी कंप्यूटर पे इमारतों के ख़ाके खींचा करता हूँ…. बोलो तो ये काम बदल लें…. आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़े सब शिकवे और शिकायतें, मुझे बेनामी का भोलापन लौटा दो….. रोज शाम तुम्हे देखता हूँ मॅरी के साथ मरीन ड्राइव पे, मैं भी रीना, टीना, गीता, रानी और आरती के साथ फ्राइडे नाइट पब मे जाता हूँ…. बोलो तो ये प्यार बदल लें…. आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़े सब कसमे और वादे, मुझे बेनामी का सीधापन लौटा दो….. अक्सर तुम्हे पाता हूँ पान वाले, नन्हे नंदू और गंगा काकी से बतियाते, मैं भी घंटो कान्फरेन्स कॉल पे बातें करता हूँ…. बोलो तो ये पहचान बदल लें… आओ आज नाम बदल लें…! – गौरव संगतानी

क्या लिखूं…. 0

क्या लिखूं….

क्या लिखूं…. पैगाम लिखूं… तुझे जज़्बात लिखूं… या अपने ये हालात लिखूं…. क्या लिखूं…. रातें लिखूं… वो बातें लिखूं… या ठहरी हुई मुलाक़ातें लिखूं… क्या लिखूं…. जीत लिखूं… इसे हार लिखूं…. या प्यार का व्यापार लिखूं….. क्या लिखूं…. तुझपे लिखूं… खुद को लिखूं…. या बेहतर है कुछ ना लिखूं….. क्या लिखूं…. – गौरव संगतानी

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं…. 8

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं….

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं, तुम कह देना कोई खास नही…….   एक दोस्त है कच्चा पक्का सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा….. जज़्बाद को ढकके एक परदा बस, एक बहाना अच्छा...

तेरा गम 0

तेरा गम

हो गयी है शाम, तेरी याद आ रही है | हर तरफ है धुन्ध, हर आस जा रही है || खो गया है अब तो मेरा खुद का वजूद भी, ना जाने किस लिहाज़ से ये सांस आ रही है|| तेरे दिए गम के साथ ही जिए जा रहा हूँ, कैसे कर लूँ यकीन तेरी तरह छोड़ के ना जाएगा ये| किसी और से ना उम्मीद ना गिला है कोई अब, तेरे गम के दायरे मे ही ये उम्र जा रही है || – गौरव संगतानी

मेरा मुक़द्दर….! 0

मेरा मुक़द्दर….!

रातों को चुपके से कोई साया आता है, हवा का हर झोंका तेरी याद लाता है | कब तक यूँ ही तपड़ता रहूँगा मैं, क्यों हर बार मेरा मुक़द्दर मेरे दर से लौट जाता है ||  गौरव संगतानी

वो चाहत कहाँ से लाओगे…! 1

वो चाहत कहाँ से लाओगे…!

जितना चाहा है तुम्हे…. वो चाहत कहाँ से लाओगे…! चाहत मिल भी गयी तो ये दिल कहाँ से लाओगे..! दिल ढूँढ भी लिया तुमने तो वो इतना जल नही पाएगा, मैं फिर कहता हूँ….. जितना चाहा है तुम्हे कोई चाह नही पाएगा…! – गौरव संगतानी

बात बहुत मामूली है….. 5

बात बहुत मामूली है…..

रात तब नहीं होती जब अंधेरा आ जाता है,  रात तब होती है जब उज़ाला चला जाता है…… बात बहुत मामूली है…..इसिलिये तो खास है…..! दर्द तब नहीं होता जब कोई भुला देता है, दर्द तब होता है जब वो याद बहुत आता है…….. बात बहुत मामूली है…..इसिलिये तो खास है…..! मैं तब नहीं थकता जब बहुत चल लेता हूँ, मैं बहुत थक जाता हूँ जब खुद को अकेला पाता हूँ… बात बहुत मामूली है…..इसिलिये तो खास है…..! ज़ुल्म तब नहीं बढ़ता जब लोग बुरे हो जाते हैं, ज़ुल्म तब बढ़ जाता है जब अच्छे लोग सो जाते हैं…. बात बहुत मामूली है…..इसिलिये तो खास है…..! – गौरव संगतानी

Nandigram : The Truth of Indian Democracy 4

Nandigram : The Truth of Indian Democracy

Nandigram………! “Have your heard this word” “Yes I think it was something which was coming on Aaj Tak before that thrilling Murder Story. I was waiting for my favorite crime program…….” What this they are...

शाम 2

शाम

शाम होते ही चरागों को बुझा देता हूँ मैं, इक दिल ही काफी है तेरी याद में जल जाने के लिए | -अग्यात