Category: ख्वाब

एक मोहब्बत बेनाम 6

एक मोहब्बत बेनाम

क्यूँ मसरूफ रहें हर वक्त, चंद लम्हें फुर्सत के भी बिताएं जाएँ | क्यूँ हर रिश्ते का नाम हो, एक मोहब्बत बेनाम भी निभाई जाये || तेरा नाम न आ जाये जुबान पे, ये...

सोचा नहीं कभी हमने 1

सोचा नहीं कभी हमने

सोचा नहीं कभी हमने, क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है | क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं, आँखें क्यूँ हैरान हैं || सोचा नहीं कभी हमने, क्या रिश्ता ये अनजाना सा | क्या डोर बांधें है...

हत्थां ते लिखा नहीं मिटदा….. 4

हत्थां ते लिखा नहीं मिटदा…..

हत्थां दा लिख्या लक्ख मिटाए कोई, हत्थां ते लिख्या नहीं मिटदा….. लक्ख करें जतन तू जट्टा, किस्मत दा लिख्या नहीं मुकदा…. लोकी पराये हो गए, ते हुए अपने बेगाने… किस्मत दा ए रोला सारा,...

जिंदगी की दास्ताँ 2

जिंदगी की दास्ताँ

खुद में उलझ के रह गयी, ये जिंदगी की दास्ताँ.. कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं, न संग कोई कारवां…. – गौरव संगतानी

आज बिछडे हैं….. गुलज़ार 5

आज बिछडे हैं….. गुलज़ार

कच्ची मिट्टी है, दिल भी इंसा भी
देखने ही में सख्त लगता है
आंसू पोंछे तो आंसुओं के निशां
खुश्क़ होने मे वक़्त लगता है

खुशबु तेरी 5

खुशबु तेरी

भीनी भीनी सी खुशबु तेरी, महका महका सा एहसास है… | एक अरसा हुआ तुझको देखे हुए… पर तू हर लम्हा मेरे पास है…. || – गौरव संगतानी

जिंदगी यूँ चली 4

जिंदगी यूँ चली

जिंदगी यूँ चली, होके खुद से खफ़ा | पाके भी खो दिया, हमने सब हर दफ़ा || कोई साथी नहीं, कोई संग ना चला | दर्द की रह में, हँसी हुई बेवफा || –...

कैसे कह दूं….!!! 7

कैसे कह दूं….!!!

कैसे कह दूं कि तेरी याद नही आती है, मेरी हर सांस मे बस तू ही महकाती है. आज भी रातों को जब चौंक के उठता हूँ, बस तू ही नही, हर शह तो...

आख़िर क्यूँ.. 8

आख़िर क्यूँ..

कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..???   कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं होता कोई तर्क नहीं होता आप स्वीकारें न स्वीकारें…. कोई फर्क नही होता….!!!   कुछ...

दिल्ली धमाके 3

दिल्ली धमाके

दिल्ली धमाको क़ी खबर देखी तो कुछ सवाल से फिर से घूमने लगे जहन में….  सोचा कुछ लिखू…. पर याद आया कि कल ही एक फिल्म देखी थी ‘आ वेडनेसडे‘…..  उसमे नसारूद्दीन शाह के संवाद, काफ़ी हद तक बहुत कुछ बयान करते है….  उसी के अंश दे रहा हूँ…. कुछ भाग काट दिया है ताकि आपका फिल्म देखने का मज़ा खराब ना हो… बहुत कुछ सोचने को मजबूर करते हैं….. क्या कहते हैं आप….? _________________________________________________________________ ” आपके घर मे कोकरोच आता है तो आप क्या करते हैं साहब…. उसे पालते नही मारते हैं….. “ _________________________________________________________________ “तुम हो कौन..?” “मैं वो हूँ आज बस और ट्रेन मे चड़ने से डरता है….. मैं वो हूँ जो काम पे जाता है तो उसकी बीबी को लगता है कि जंग पे जा रहा है…… पता नही लौटेगा कि नही…. हर दो घंटे बाद फोन करती है…. चाइ पी कि नही.. खाना खाया कि नही… दरअसल वो ये जानना चाहती है कि मैं ज़िंदा हूँ कि नहीं…. मैं वो हूँ जो कभी बरसात मे फस्ता है कभी ब्लास्ट में… मैं वो हूँ जो किसी के हाथ मे तस्वीर देख के शक करता है… और मैं वो भी हूँ जो आजकल दाडी  बड़ाने और टोपी पहनने से डरता है….. बिज़्नेस के लिए दुकान खरीदता है तो सोचता है दुकान का नाम क्या रखूं… कहीं दंगे मे नाम देख के मेरी दुकान ना जला दें…… झगड़ा किसी का भी हो…. बेवजह मरता मैं ही हूँ…. भीड़ तो देखी होगी ना अपने… भीड़ मे से कोई एक शकल चुन लीजिए….. मैं वो हूँ… “ ___________________________________________________________________ “पिछली बार ट्रेन मे मारा था, इस बार कही और मारेंगे..और तब तक मारते रहेंगे जब तक हम इन्हे जवाब देना नही सीखेंगे…. ……. मैं साबित कुछ नही करना चाहता… मैं सिर्फ़ आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि लोगों मे गुस्सा बहुत है…...