सोचा नहीं कभी हमने,
क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है |
क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं,
आँखें क्यूँ हैरान हैं ||

सोचा नहीं कभी हमने,
क्या रिश्ता ये अनजाना सा |
क्या डोर बांधें है हमको,
क्यूँ लगता सब अफसाना सा ||

सोचा नहीं कभी हमने,
क्या होगा जब तुम जाओगे |
खुद को ही खो देंगे हम,
तेरी यादों में ही खोएंगे ||

– गौरव संगतानी

 

One Response to सोचा नहीं कभी हमने

  1. RaniVishal says:

    Bahut Khubsurat ahsaaso se saji sundar rachana par aapko badhai.!!
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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