भाषा में लिपि का महत्व क्या है? क्या इनमे कोई सम्बंध है? मैंने तो सदा से भाषा को उसकी लिपि के साथ ही पढ़ा था। हिंदी को देवनागरी लिपि में, और अंग्रेज़ी को उसकी लिपि (उसे जो भी कहते हों )

क़रीब २००२ या २००३ में जब मोबाइल फ़ोन आम आदमी के हाथ में आए, उसमें एक रोचक चीज़ ने लोकप्रियता पानी शुरू की, वो थी एसएमएस। उस समय मोबाइल फ़ोन केवल इंग्लिश ही सपोर्ट करते थे। एक तो तकनीक नयी थी दूसरा एक थर्ड वर्ल्ड कंट्री की भाषा को शामिल करने की किसी को ना ललक थी ना इस से कोई फ़ायदा होने वाला था। भारत में मोबाइल लेने वालों की मार्केट उन लोगों पर केंद्रित थी जिनके लिए मोबाइल स्टेटस सिम्बल था और हिंदी उस स्टेटस सिम्बल के लिए ख़तरा (आज भी बहुत कुछ नहीं बदला है पर भाषा के ऊपर कई और चीज़ें अब स्टेटस सिम्बल की दुश्मन हैं) । इसलिए भारत में मोबाइल तो अंग्रेज़ी भाषियों के लिए बना था पर अचानक ये हर व्यक्ति के हाथ में पड़ गया l चाय वाले से लेकर ठेले तक, इसका विस्तार इतनी जल्दी बढ़ा की तकनीक पीछे रह गयी । मुझे आज भी याद है २००३ में दिल्ली वो दृश्य, हमारे हॉस्टल के सामने वाले राजमा चावल के ठेले पर मोबाइल नम्बर लिखा था और लिखा था होम डेलवरी के लिए कॉल करें।

जब इस जनता ने एसएमएस को उपयोग करना चाहा तो दिक़्क़त हुई तो उसने अपने तरीके निकले | अविष्कार हुआ रोमन हिंदी का, ये जुगाड़ आम आदमी का था वो हिंदी जो अंग्रेजी लिपि में लिखी जाती है और हिंदी की तरह पढ़ी जाती है | भारत का एक बहुत बड़ा तबका जो की इन्टरनेट उपयोग करता है, इसी हिंदी को जनता है | ये पता नहीं सही है या गलत पर यही वस्तुस्तिथि है और इसके बेहतर होने (देवनागरी लिपि की ओर जाने) की उम्मीद बहुत कम है |

करीब दो साल पहले जब मैंने बैंगलोर लिटरेचर फेस्टिवल में एक उर्दू के लेखक को कहते सुना की उर्दू अरबी लिपि में ही लिखी जानी चाहिए देवनागरी में नहीं तब कुझे आश्चर्य हुआ की उर्दू को देवनागरी लिपि से खतरा है और हिंदी को रोमन हिंदी से | कल जब राम जेठमालानी को सिन्धी को देवनागरी में लिखे जाने का विरोध करते देखा तो यह विचार फिर से दिमाग में आया कि भाषा में लिपि का कितना महत्व है | उन्होंने कहा ही किसी भाषा को खत्म करने की पहली सीडी है कि उसकी लिपि को मार दो, शायद ये सही भी हो |

पर फिर ख्याल आता है कि रोमन हिंदी ने हिंदी को खत्म किया या जब तक तकनीक देवनागरी को अपना पाती उसने हिंदी बोली (भाषा नहीं कहूँगा) को सहारा दिया और इन्टरनेट और मोबाइल पर जिन्दा रखा | पर ये भी सच है की आज अगर आप रोमन हिंदी में कुछ लिखे तो अधिक लोग पड़ते हैं बजाय देवनागरी में |

तो पहले किसको बचाएं हिंदी को, देवनागरी को या रोमन हिंदी को, या रहने दें सब ऐसे ही, जिसको बचना होगा स्वयं ही बच जायेगा |

 

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