बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है…!

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2 Responses

  1. umesh kumar says:

    अहा…!अनुभूति…अवर्णनीय…चंद पंक्तियों में आपने कहाँ से कहाँ पहुंचा दिया….धन्यवाद

  2. mehhekk says:

    बजते हैं ख़यालों में तेरी याद के घुँगरू
    कुछ दिन से मेरा घर भी परीखाना हुआ है

    मौसम ने बनाया है निगाहों को शराबी
    जिस फूल को देखूं वही पैमाना हुआ है

    waah bahut khub

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