दिल्ली धमाके

You may also like...

3 Responses

  1. umeshawa says:

    उम्दा लेखन , धन्यवाद। लेकिन ईन विस्फोटो से नुकसान किसका हो रहा है। पहला नुक्सान हिन्दुओ का क्योकी वे मारे जा रहा है। मुसल्मान भाईयो की छवि को भी कम नुक्सान नही हो रहा है। लोग सोचते है की क्यो कुरान को ही पढ कर लाग आतंकी बन रहे है?

    लेकिन मै सोचने पर विवश हो जाता हुं की कही कोई तीसरा तो नही जो इन वारदातो के पीछे है। क्योकी तीसरा बेहद ताकतवर है। भारत के सत्ता के शीर्ष पर उसकी गहरी पकड है। सोचने मे हर्ज क्या है?

  2. उमेश जी सर्व प्रथम आपका धन्यवाद् कि आपने अपना अमूल्य समय इस पोस्ट को दिया…

    परन्तु. शायद कुछ बातों में मैं आपसे सहमत न हो पाउँगा……

    जब बम फटता है तो हिंदू या मुस्लमान देख के नही फटता…. उस भीड़ में सभी तरह के लोग होते हैं ……..

    खून का कोई मजहब नही होता…….. दर्द सब को एक सा होता है अपनों को खोने का……

    इस धमाके में जन गवाएं लोगों के नाम देखियेगा…. सभी मजहब के लोग हैं…….

    – गौरव संगतानी

  3. yeah, i agree with you gaurav. topic is nicely composed and the way you think is very sensitive.

    regards.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *