आज अश्कों का तार टूट गया
रिश्ता-ए-इंतज़ार टूट गया

यूँ वो ठुकरा के चल दिए गोया
इक खिलौना था प्यार टूट गया

रोए रह-रह कर हिचकियाँ लेकर
साज़-ए-गम बार बार टूट गया

‘सैफ’ क्या चार दिन कि रंजिश से
इतनी मुद्दत का प्यार टूट गया

– सैफुद्दीन सैफ

 

2 Responses to टूट गया

  1. सैफुद्दीन सैफ को पढ़ना एक अनुभव रहा. आभार.

  2. mehek says:

    shayad hamne unhe pehli baar padha hai,bahut hi khubsurat nazm

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