ये कैसी है तेरे इश्क की जादूगरी,
अभी तू यहीँ है और नहीं अभी |
अभी तुझसे मिलकर हँसे थे हम,
अभी तुझे खोकर रो दिये भी |

तू ही तन्हाइयोँ में साथ मेरे,
तू ही भीङ में करे तन्हा |
तू ही तो ख्वाबोँ में है मेरे,
तू ही रातों को जगाये भी |

ये कैसी है तेरे इश्क की जादूगरी,
अभी तू यहीँ है और नहीं अभी |

– गौरव संगतानी

 

One Response to जादूगरी

  1. और तराशों…भाव बढ़िया हैं.

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