बहुत पहले लिखा था ये शेर, आज भी दिल के बहुत करीब है…..!

तेरी हर बात मानी है हमने,
अब ये ना कहना ऐ दिल धङकना छोङ दे |
दिल है तो धङकेगा,
दर्द होगा,
आँसू भी होंगे,
आँखों से ना कहना छलकना छोङ दे….!

– गौरव संगतानी

 

2 Responses to छलकना छोङ दे

  1. mehhekk says:

    bahut bdhiya kaha apne
    ard hai ankein tho chalkengihi.

  2. मीत says:

    अच्छा है. बकौल ग़ालिब :
    दिल ही तो है न संग-ओ-खिश्त, दर्द से भर न आये क्यों
    रोयेंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों

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