कर न फकीरी फिर क्या दिलगीरी, सदा मगन में रहना जी….
कोई दिन हाथी न कोई दिन घोडा, कोई दिन पैदल चलना जी….

कैसा भी तो वक्त मुसाफिर, पल भर न घबराना जी….
कोई दिन लड्डू न कोई दिन पेडा, कोई दिन फाकम-फाका जी…..

कोई फर्क नहीं होता है राजा और भिखारी में,
दोनों की सांसे काटी हैं समय की तेज कटारी ने…
अपनी ही रफ़्तार से हर दम, काल का पहिया चलता जी….
कोई दिन महला, न कोई दिन सेजा, कोई दिन खाक बिछोना जी….

माँ से अच्छा कुछ न होता, माँ तू ही परमेश्वर है….
हर दम मेरे मन मंदिर में, तेरी जोत उजागर है….
सब रिश्ते नाते झूठे हैं, माँ का प्यार ही सच्चा जी…
कोई दिन भैया न कोई दिन बहना, सब दिन माँ की ममता जी….

कुछ भी पाए गर्व न करियो, दुनिया आनी जानी है…..
तेरे साथ जहाँ से तेरी, परछाई भी जानी है….
सबको अपना प्यार बाटना, मीठा बोल बोलना जी….
कोई दिन मेला न कोई दिन अकेला, कोई दिन खतम झमेला जी….

– संतोष आनंद

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