क्यूँ मसरूफ रहें हर वक्त, चंद लम्हें फुर्सत के भी बिताएं जाएँ |
क्यूँ हर रिश्ते का नाम हो, एक मोहब्बत बेनाम भी निभाई जाये ||
तेरा नाम न आ जाये जुबान पे, ये कहानी दिल में ही छुपाई जाये |
खुली आँखों से देखें हैं ख्वाब तेरे, एक रात जग के भी बितायी जाये ||

– गौरव संगतानी

 

6 Responses to एक मोहब्बत बेनाम

  1. बहुत उम्दा!

    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

  2. अवश्य सर जी…. अब ध्यान रखेंगे हम…. 🙂

  3. Sunali says:

    Beautiful Sir..!!

  4. Tara says:

    very poetic

  5. kundan says:

    really touching…!!!

  6. harshali says:

    I like it vry much………

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