हे प्रभु…!
मुझे इतनी उंचाई कभी मत देना
गैरों को गले से लगा ना सकूँ
इतनी रुखाई कभी मत देना

– अटल बिहारी वाजपेयी

 

2 Responses to उंचाई

  1. जी, अटल जी यह कविता बहुत पसंद आती है.

  2. kakesh says:

    अच्छी कविता है. लिखते रहें धन्यवाद.

    http://kakesh.com

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